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ऐ मुसलमान! तू अपने पालनहार का मुहताज है ... उस महिमावान् के साथ बेनियाज़ है

आपको कुछ परंपरागत दुआएँ समर्पित हैं ... अपने दिल के साथ उनके लिए तैयार हो जाएँ ...

ये हर भलाई के लिए समावेशी दुआएँ हैं

इनमें से जितना हो सके आप याद कर लें

चुनाँचे कितनी दुआएँ हैं, जो आपकी हर जरूरत के लिए पर्याप्त हैं

क्योंकि इन दुआओं के शब्द थोड़े, अर्थ व्यापक हैं

इनके साथ आपके लिए केवल आपके दिल की उपस्थिति और अपने पालनहार के प्रति समर्पण की कमी है ...

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